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सोचिए

  • किसके ऊपर कितना Dues है की जानकारी न होना
  • Dues मागनें में संकोच करना।
  • Details या Dues न बता पाना।
  • SMS/Email  से सूचना बताने की कमी।
  • मुकदमें की पूरी जानकारी जैसे कब क्या आर्डर हुआ, कौन मुकदमा देखा था आदि की पूरी जानकारी न होना।
  • मुवक्किल की पूरी जानकारी जैसे नाम, पता, फोन नं, कौन सा मुकदमा कब दिया, कितना भुगतान किया आदि की पूरी जानकारी न होना।
  • आज के मुकदमें की लिस्ट की जानकारी न होना।
  • हर वर्ष डायरी बदलने की झंझट।







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